दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पहली बारिश ने खोली पोल, सड़क पर गड्ढे और पहाड़ी से खतरा बढ़ने पर डायवर्जन 10 दिन और बढ़ा
First rain exposes flaws on the Delhi-Dehradun
देहरादून। First rain exposes flaws on the Delhi-Dehradun, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को उत्तराखंड की सबसे आधुनिक सड़क परियोजनाओं में गिना गया था, लेकिन पहली ही बारिश ने इसके दावों की परतें उधेड़नी शुरू कर दी हैं।
एक तरफ करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क दो महीने के भीतर गड्ढों से भरने लगी है तो दूसरी ओर डाट काली मंदिर के पास एलिवेटेड हिस्से के ऊपर लटक रही छह विशाल चट्टानों में से अब तक केवल तीन ही हटाई जा सकी हैं।
नतीजा, एनएचएआइ को भारी और चारपहिया वाहनों का डायवर्जन डेढ़ सप्ताह यानी लगभग 10 दिन और बढ़ाना पड़ा है।
एनएचएआइ ने दावा किया था कि मानसून शुरू होने से पहले सभी खतरनाक चट्टानों को हटाकर मार्ग पूरी तरह सुरक्षित कर दिया जाएगा। लक्ष्य आठ जून रखा गया था, लेकिन जुलाई शुरू होने के बाद भी आधा काम अधूरा है।
अब बारिश के बीच पहाड़ी काटी जा रही, जिससे खतरा भी बढ़ गया है और काम भी धीमा पड़ गया है। डाट काली मंदिर के पास पहाड़ी से बोल्डर गिरने की आशंका को देखते हुए पिछले महीने से अधिक समय से कार्य चल रहा है।
इधर उद्घाटन के करीब दो महीने बाद ही पहली तेज बारिश में सड़क पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे उभर आए हैं। जल निकासी व्यवस्था अधूरी होने को प्रमुख कारण माना गया है।
सवाल यह है कि जब पहाड़ी सुरक्षा कार्य और जल निकासी व्यवस्था दोनों अधूरे थे तो एक्सप्रेसवे को जल्दबाजी में चालू क्यों किया गया।
रोजाना हजारों वाहन झेल रहे अतिरिक्त सफर
डायवर्जन बढ़ने से देहरादून आने-जाने वाले हजारों चारपहिया वाहन और बसें वैकल्पिक मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। इससे सफर का समय भी बढ़ रहा है और शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ गया है।
केवल दोपहिया वाहनों को एलिवेटेड मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। यात्रियों का कहना है कि यदि सुरक्षा कार्य समय पर पूरे कर लिए जाते तो मानसून में यह परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
पिलर के नीचे आई दरारें
सड़क के गड्ढ़ों के बाद अब एक्सप्रेसवे के फ्लाईओवर के पिलर के नीचे गहरी दरारें भी उभरने लगी हैं। डाट काली मंदिर के लिए बनाए गए एप्रोच फ्लाईओवर के पिलर के नीचे शुक्रवार को बड़ी दरारें दिखीं।
पहाड़ी कटान का कार्य लगभग अंतिम चरण में है और अगले 10 दिन के भीतर इसे पूरा कर लिया जाएगा। इसी के साथ डायवर्जन समाप्त कर दोनों लेन यातायात के लिए खोल दी जाएंगी। हालांकि, पहाड़ी के ट्रीटमेंट कार्य में कुछ समय और लग सकता है।
-वैभव सिंह, परियोजना निदेशक एनएचएआइ